छत्तीसगढ़

गरियाबंद में बारिश का कहर 40 गांवों का संपर्क टूटा, 102 लोगों को किया रेस्क्यू

Shantanu Roy
25 Sept 2026 7:43 PM IST
गरियाबंद में बारिश का कहर 40 गांवों का संपर्क टूटा, 102 लोगों को किया रेस्क्यू
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Gariaband. गरियाबंद। जिले के देवभोग और अमलीपदर क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। देवभोग तहसील में बीते तीन दिनों के दौरान 320 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है। भारी बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं और करीब 40 गांवों का संपर्क टूट गया है। कई घरों में पानी घुस गया है, खेत जलमग्न हो गए हैं और मकानों के क्षतिग्रस्त होने की भी खबर है। वहीं अमलीपदर क्षेत्र में सूखतेल नदी की बाढ़ में फंसे 102 लोगों को नगर सैनिकों के बचाव दल ने करीब पांच घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।

लगातार बारिश के कारण देवभोग क्षेत्र के बेलाट नाला और मुंगिया नाला उफान पर हैं। तेल नदी का जलस्तर भी काफी बढ़ गया है। नदी और नालों का पानी आसपास के खेतों में भरने के कारण फसलें पानी में डूब गई हैं। ग्रामीण इलाकों में कई रास्तों पर पानी बहने से आवागमन बंद या प्रभावित हो गया है। सेनमुड़ा घाट के एप्रोच मार्ग पर करीब चार फीट ऊपर तक पानी बहने की जानकारी है। इसके चलते इस मार्ग से आवाजाही प्रभावित हुई है। कई गांवों तक पहुंचने वाले रास्ते बंद होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहने की अपील की है। मौजूदा हालात ने स्थानीय लोगों को वर्ष 2016 में आई भीषण बाढ़ की याद दिला दी है।

देवभोग तहसीलदार सुशील कुमार भोई शुक्रवार सुबह प्रशासनिक टीम के साथ प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों तक प्रशासन की टीम पहुंच सकती है, वहां पटवारियों के साथ टीम भेजकर स्थिति का आकलन कराया जा रहा है। जिन इलाकों में सड़क और रास्ते बाधित होने के कारण टीम नहीं पहुंच पा रही है, वहां कोटवार और पटेलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को नदी-नालों के तेज बहाव के दौरान जोखिम नहीं उठाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी जा रही है। बारिश और बाढ़ के कारण मकानों, फसलों एवं अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन भी किया जाएगा। तहसीलदार के मुताबिक नुकसान का सर्वे कर नियमानुसार क्षतिपूर्ति के प्रकरण तैयार किए जाएंगे।

इधर अमलीपदर तहसील में शुक्रवार सुबह सूखतेल नदी का जलस्तर बढ़ने से हालात गंभीर हो गए। नदी का तेज बहाव अमलीपदर के आश्रित बहरपारा समेत आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच गया। खेत-खलिहानों और आश्रित पारे के आसपास पानी भरने के कारण कई इलाके टापू में तब्दील हो गए और वहां रहने वाले लोग फंस गए। लोगों की ओर से मदद की अपील किए जाने के बाद तहसीलदार अजय चंद्रवंशी ने जिला अधिकारियों से संपर्क किया। इसके बाद नगर सैनिकों के बचाव दल को मौके पर भेजा गया। टीम ने करीब पांच घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और बाढ़ के बीच फंसे 102 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। भारी बारिश का असर बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा है। इंदागांव स्थित 132 केवी सब-स्टेशन के आसपास पेड़ गिरने और बिजली के तार टूटने के कारण गुरुवार रात से करीब 200 गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित है। बिजली व्यवस्था बहाल करने के लिए शुक्रवार सुबह से सहायक यंत्री हेमंत नागवंशी के नेतृत्व में 30 से अधिक कर्मचारियों की टीम काम कर रही है।

लगातार बारिश, जंगल और दुर्गम इलाकों के कारण बिजली लाइन में आई खराबी तलाशने और मरम्मत करने में कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर बिजली के खंभे और तार क्षतिग्रस्त होने की जानकारी है। करीब 12 घंटे बाद भी सभी फॉल्ट का पता नहीं लगाया जा सका था। सहायक यंत्री हेमंत नागवंशी के मुताबिक मेन लाइन के साथ सहायक लाइनों में भी खराबी आई है। फिलहाल मेन लाइन को ठीक करने का काम प्राथमिकता से किया जा रहा है। छह से अधिक स्थानों पर फॉल्ट ठीक किए जा चुके हैं, जबकि अन्य स्थानों पर खराबी तलाशने का काम जारी है। देवभोग और अमलीपदर क्षेत्र में प्रशासन की टीमें हालात पर नजर बनाए हुए हैं। लगातार बारिश के कारण नदी-नालों के जलस्तर में बदलाव की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रभावित गांवों में स्थिति सामान्य करने, बिजली आपूर्ति बहाल करने और बारिश से हुए नुकसान का आकलन करने का काम जारी है।
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